पाँच घण्टे बर्फ में फंसे रहे यात्री:आपदा टीम नदारत

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 आपदा प्रबंधन और प्रशासन की खुली पोल।

मौसमआ@आ विभाग द्वारा  भारी बर्फबारी और बारिश की पूर्व चेतावनी  के बाद भी अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर आपदा प्रबंधन और  प्रसाशन की पोल खुल गयी।लगातार दो दिनों से पहाड़ों में हो रही बारिश और बुधवार की सुबह से हो रही बर्फबारी के बाद भी पहाड़ों में आपदा टीम,पुलिस, औरलोकनिर्माण विभाग की उदासीनता साफ नजर आयी।

  अल्मोड़ा-हल्द्वानी हाईवे पर भवाली के पास  4 घण्टे दोनों ओर गाड़ियां फंस गई जिस कारण भवाली से लेकर कैंची धाम तक 10 किलोमीटर का लंबा जाम लग गया।सड़क के दोनों ओर गाड़ियां आड़ी तिरछी खड़ी हो गयी।हैरानी की बात है कि इतने लंबे जाम को खोलने के लिए सिर्फ  1 पुलिस कर्मी नजर आ रहा था बच्चे,बूढे, बीमार इस चुभती ठंड में चार घण्टे तक ठंड से तड़पते रहे ।

  जाम इतना भयंकर था कि भवाली से 40 किमी दूर क्वारब पुलिस चौकी पर अल्मोड़ा से   हल्द्वानी की ओर जा रही गाड़ियों को रोका गया।जहाँ पर न तो कोई ढाबा या रेस्टोरंट ही था जहां पर लोग चाय पी सकें।उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनसील है ऐसे में आपदा प्रबंधन टीम,लोकनिर्माण विभाग तथा प्रसाशन की उदासीनता के चलते कुमायूं मंडल के पिथौरागढ़,अल्मोड़ा, बागेस्वर जनपदों से आने वाले यात्रियों को 4- 5 घण्टे मुश्किलों का सामना करना पड़ा।सबसे अहम बात ये है कि पहाड़ी जनपदों का हल्द्वानी जीवन रेखा है क्योंकि पहाड़ों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में मरीजों को हल्द्वानी और अन्य जगहों को जान पड़ता है।गनीमत रही कि कोई बड़ी वारदात नहीं हुई ।पहाड़ के लिए कभी भी अच्छे दिन आये नहीं इसलिए पलायन से पहाड़ के गाँव के गाँव वीरान होते आ रहे हैं।पहाड़ी राज्य होकर भी पहाड़ के लोग पहाड़ सी कठिनाईयों से जूझ रहे है।सबसे बड़ी विडंबना ये देखी गयी कि इस बीच कहीं भी कोई मोबाइल नेटवर्क भी नहीं था।ऐसे में लोगों के परिजनों पर क्या बीती होगी ।जबकि अल्मोड़ा से हल्द्वानी ढाई घण्टे का सफर है और आज ये सफर 6 घण्टे का हुआ।हाईवे पर ये हालत है तो पहाड़ के दूर दराज क्षेत्रों का क्या हाल होगा।भले ही बुलेट ट्रेन न दौड़े ,स्मार्ट सिटी न बने मगर पहाड़ की सड़को को सुधारने की सख्त जरूरत है।

 


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