उत्तराखंड में भ्रष्टाचार।तीन साल में दो मुख्य शिक्षा अधिकारी गए जेल।

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 SBN खबर

आखिर उत्तराखंड में क्यों फल फूल रहा है भ्र्ष्टाचार ?तीन साल में एक ही तरीके से 15 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए  रंगे हाथों पकड़े गए अल्मोड़ा के मुख्य शिक्षा अधिकारी ।

 इसको साजिश कहें या संयोग उत्तराखंड राज्य में भरष्टाचार दीमक की तरह फैल चुका है।तीन साल में शिक्षा विभाग के दो मुख्य शिक्षा अधिकारी रंगे हाथ पकड़े गए घूस लेते हुए।

उत्तराखंड पृथक राज्य बनने के बाद शिक्षा विभाग में अधिकारियों की फौज खड़ी कर दी गयी ।जिस मकसद से अधिकारियों को तैनात किया गया था उस हिसाब से शिक्षा विभाग में शिक्षकों तथा कर्मचारियों की परेशानी कम होने के बजाय ज्यादा बढ़ गई। अधिकारियों की मनमानी कार्यशैली से कई बार शिक्षा महकमे को शर्मसार होना पड़ा है। इसको साजिश कहा जाए या संयोग उत्तराखंड राज्य के जनपद अल्मोड़ा में 3 साल के अंतर्गत दो मुख्य शिक्षा अधिकारी रु015000 की रिश्वत लेते हुए सतर्कता विभाग द्वारा रंगे हाथों गिरफ्तार किए गए हैं। भ्रष्टाचार को शून्य करने की सरकार की कोशिशों को घूसखोर अधिकारी ज्यादा  पनपाने में लिप्त पाए गए हैं। मामला अल्मोड़ा जनपद के मुख्य शिक्षा अधिकारी का है जिनको विजिलेंस टीम ने 15000 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया है।

विदित हो कि विगत 3 वर्षों से आरोपी मुख्य शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात जगमोहन सोनी शुरू से ही विवादों में घिरे रहे हैं ।मामला आर्य कन्या इंटर कॉलेज अल्मोड़ा में शिक्षकों की नियुक्ति में भी उन पर धांधली के आरोप लगे थे। तत्कालीन जिलाधिकारी  सविन बंसल ने जांच कमेटी बना दी थी। लेकिन कुछ समय के लिए जगमोहन सोनी को अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया। जिला अधिकारी का स्थानांतरण होते ही जगमोहन सोनी को पुनः मुख्य शिक्षा अधिकारी की कमान सौंपकर अल्मोड़ा भेज दिया गया

सवाल:अटैच करने के आदेश के बाद भी कैसे डटे रहे अल्मोड़ा में बतौर मुख्य शिक्षा अधिकारी!
संयोग या साजिश
26 जनवरी 2019 का आदेश

26 जनवरी 2019 को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे पिथौरागढ़ दौरे पर जा रहे थे। धौला देवी ब्लॉक में जनप्रतिनिधियों तथा समाजसेवियों ने जगमोहन सोनी पर अशासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति तथा विज्ञापन को लेकर कथित रूप से घूस लेने का आरोप लगाया था। शिक्षा मंत्री ने तत्काल एक्शन लेते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी जगमोहन सोनी को अल्मोड़ा के मुख्य शिक्षा अधिकारी के पद से हटाकर शिक्षा निदेशालय देहरादून में अटैच कर दिया था। 26 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश होने के उपरांत भी रिश्वतखोर अधिकारी को तत्कालीन शिक्षा सचिव भूपेंद्र कौर के निर्देश पर पद से हटाते हुए शिक्षा निदेशालय अटैच करने के निर्देश जारी कर दिए थे शिक्षा मंत्री तथा शिक्षा सचिव के आदेश को ठंडे बस्ते में आखिर कैसे डाला गया?क्या कोई बड़ी मछली उसको बचाने में लिप्त थी इसकी भी जांच होनी चाहिए। भ्रष्टाचारी मुख्य शिक्षा अधिकारी जगमोहन सोनी 1 साल तक इसी पद पर आराम से आखिर कैसे डटे रहे? भ्र्ष्टाचार पर ज़ीरो टोलीरेन्स की बात करने वाले उत्तराखंड में  भ्रष्टाचार दिन व दिन बढ़ता ही जा रहा है। एक ही  जिले में तैनात मुख्य  शिक्षा अधिकारियों का एक ही प्रकार से सतर्कता टीम द्वारा रंगे हाथों पकड़े जाना साजिश है या संयोग यह बड़ी विचित्र घटना है।

 शिक्षा सचिव के आदेश जारी होने के बाद भी ऐसा रिश्वतखोर भ्रष्ट शिक्षा अधिकारी आखिर 1 साल तक किसके छत्रछाया में अपने पद पर बना रहा। इस बीच कितने ऐसे कांड हुए होंगे जो उजागर नहीं हुए हैं। मगर आज एक सेवानिवृत्त शिक्षक नंदन सिंह परिहार ने हिम्मत जुटाकर इस भ्रष्टाचार के दीमक का पर्दाफाश किया। जिस कारण वह भ्रष्टाचार निरोधी दस्ते के हाथ  चढ़ गया।

ये संयोग या साजिस:– मुख्य शिक्षा अधिकारी अल्मोड़ा जगमोहन सोनी को  विजिलेंस टीम द्वारा पकड़ा जाना पहला मामला नहीं है। ये महज  संयोग है या साजिस ।इससे   पहले भी अल्मोड़ा के मुख्य शिक्षा अधिकारी  एके सिंह को सतर्कता विभाग के दल ने 28 अप्रैल 2017 को ₹15000 रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।   एके सिंह पर  अल्मोड़ा के नियाज गंज निवासी  रिजवानुर -रहमान  से सिटी मॉडल जूनियर हाई स्कूल की मान्यता के लिए ₹20000 की मांग की थी। लेकिन रिजवानुर- रहमान द्वारा एके सिंह से रकम की राशि कम करने की गुहार लगाई। वह रु015000 में मान गये। शिकायतकर्ता ने तंग आकर सतर्कता विभाग को शिकायत की। 28 अप्रैल 2017 को सतर्कता विभाग की टीम ने एके सिंह को  शिकायतकर्ता से ₹15000 रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया था। जीरो टॉलरेंस कि सरकार की छवि को धूमिल करने की यह साजिश है या संयोग! इस पर गहन जांच पड़ताल की जरूरत है।


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