क्वारंटाइन काल में भी जीवित है जाति का वायरस!!ये कैसा हिन्दूपन?

कोरोना महामारी ने पूरी दुनियां में कोहराम मचा रखा है.देश के विभिन्न क्षेत्रों से घर वापस आये लोगों को गाँव में ही 14 दिन तक क्वारंटाइन किया जा रहा है.क्वारंटाइन काल में खाने की व्यवस्था प्रशासन द्वारा की गई है.और खाना पकाने के लिए स्कूलों में कार्यरत भोजन माताओं को जिम्मेदारी दी गयी है.लेकिन हैरानी की बात है कि जिन क्वारंटाइन केंद्रों पर भोजन माताएं हिन्दू तो हैं,मगर जाति के दलित है,उन केंद्रों पर उच्च जाति के लोग खाना खाने से मना कर रहे हैं.एक कहावत है “रस्सी तो जल गई मगर ऐठन नहीं गयी”

वो हिन्दू कौन और ये हिन्दू कौन?

बायोलॉजिकल सिद्धान्त के आधार पर मानव की उत्तपत्ति एक समान है.चाहे वह भारत का हो या दुनियाँ के किसी भी कोने पर.भौतिक बनावट भिन्न हो सकती है परंतु मानव की बॉयोलोजिकल और केमिकल गुण धर्म समान ही होते हैं.मानव के बनाये धर्मों ने इंसानों में विभेदीकरण किया है.भारत इस विभेदीकरण में विश्व में प्रथम स्थान पर होगा.जो हिन्दू जमीन जोतता है,फसल उगाता है,देश को स्वच्छ रखने के लिए सर में मैला ढोता है.घर बनाता है,मन्दिर बनाता है, लोहे का काम करता है,तांबे के बर्तन बनाता है,बढ़ई का काम करता है,मेहनत करके अमीरों और उच्च जातियों के बड़े-बड़े भवन बनाता है.कठिन मेहनत करके देश की सेवा करता है.वो ऐसा कोई ऐसा अपवित्र कार्य नहीं करता जिससे उससे घृणा की जा सके. फिर क्वारंटाइन काल में ये कैसी घृणा?

.वो हिंदू जो जानवरों, गाय ,घोड़ा, बैल जिनके पूजनीय थे. जो प्रकृति के उपासक ,सूर्य देवता ,अग्नि देवता मरु देवता , वायु देवता को पूजते रहे हैं. वो हिन्दू जो पथर में भी भगवान ढूंढते हैं,जिन हिंदू ने विश्व को सत्यम शिवम सुंदरम तथा वसुधैव कुटुंबकम का संदेश दिया. वो हिंदू जिन्होंने अहिंसा को सर्वोपरि रखा.दया और क्षमा तथा करुणा का धर्म आज कैसे खून से लथपथ हो रहा है? अपने पुरखों के तारण के लिए एक हिंदू अखंड तप के बल पर गंगा को पृथ्वी पर उतार लाया और उन हिंदुओं की संताने उसी गंगा को कैसे अपवित्र कर रहे हैं ? पौराणिक वैदिक तथा सनातन हिंदू इतनी जल्दी विकराल रूप धारण कर कैसे निष्ठुर ,निर्दयी,दयाहीन,तथा अमानवीय होता जा रहा है ?एक वो हिंदू ग्रंथ हैं जो जीवो पर दया करो, तथा नारी को सम्मान देते हुए कहते हैं कि जहां नारी पूजी जाती है वहां देवता निवास करते हैं .मगर मंदिरों आश्रमों तथा संरक्षण घरों में भी आज नारी सुरक्षित नहीं! यह कौन हिंदू हैं ?जिन हिंदुओं के नाग, सांप भी देवता है वह हिंदू आज खुद क्यों विषैले हो गए हैं ?अगर धर्म के अस्तित्व और महत्व का सवाल है तो विधर्मी और हिंदू में किस बात का अंतर है ?हिंदू धर्म जीवो पर दया करने का संदेश देता है और जीव हिंसा को पाप मानता है .और हिंदू की नजरों में मुसलमान कसाई या कुरूर हत्यारा है. जो शिकार को हलाल करके या तड़पा तड़पा कर मारता है. और हिंदू उसी हत्या को श्रेष्ठ समझता है झटके से मारने पर! यह कहां की धर्म निष्ठा और तार्किक है ?बूचड़ की दुकानों पर भी धर्म की प्रतियोगिता है. हलाली मीट शॉप, और हिंदू झटका मीट शॉप. भारतीय दंड संहिता में मर्डर की सजा एक ही है चाहे मर्डर मुसलमान ने किया हो या हिंदू ने .चाहे एक झटके से गर्दन काटे गए हो या हलाल करके .कानून की नजरों में हत्या की सजा समान ही होती है .

हिंदू धर्म के बाबा साधु संतों की करतूतें हम देख रहे हैं .अनैतिकता और ढोंग का चोला ओढ़कर हिंदू आस्था को जेल की कोठरी में बंद कर रहे हैं .फिर वर्तमान युग में यह सवाल उठता है कि हिंदू धर्म इस तरह से क्यों विकृत रूप धारण कर रहा .?बात सिर्फ दलित के हाथ से खाने की नहीं है.आखिर 21वीं सदी में हम इंसान को अगर इंसानियत के नजरों से नहीं देखते तो फिर विश्व गुरु नहीं विश्व गुलाम भारत बनने से कोई नहीं रोक सकता.

बच्चपन से ही घुल रहा है जाति वाद का जहर:

सिर्फ क्वारंटाइन काल में ही जातिवाद झलक रहा है ऐसा नहीं है.दरअसल जातिवाद की जड़ें भारत में कण-कण में व्याप्त है.कई ऐसी घटनाएं स्कूलों से भी आती हैं जहाँ देश के भावी कर्णधार पैदा होते हैं.दलित भोजन माता होने पर स्कूल के उच्च हिन्दू जाति के बच्चे खाना नहीं खाते.जब शिक्षा के मंदिर से ही जातिवाद का जहर घुलने लगता है तो बड़ा होकर ओ भयंकर रूप धारण करेगा ही.

Sochbadlonow

I am I.P.Human My education is m.sc.physics and PGDJMC I am from Uttarakhand. I am a small blogger

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