जिंदगी और बसन्त:बस आते जाते जाते रहते हैं।

 

परिवर्तन प्रकृति का नियम है.जिस तरह मौसम और ऋतुएं  बदलटी रहती  हैं  ,उसी प्रकार जिंदगी और बसंत भी आते जाते रहते हैं.

हरियाली का खाक बनाकर

जब बीती थी सर्दी

बसंत ऋतु ने आकर

पुनः नई जवानी भर दी।

खिलते फूलों की कलियों पर,

जब भंवरा मंडराता है,

हरे पेड़ों की डाली से

कोयल जब गाती है

बैठे बैठे खो जाता हूं जब इनकी बोली सुनता हूं

इन सब में से सबसे मीठी बचपन की यादें पाता हूं।।

 

ख़ुशियाँ आयी   पल भर में चली गयी,

गमों की बस्ती सदा आबाद रही।

मैंने क्या नहीं किया बेरहम,

तेरी मुस्कराहटों के खतिर,

तू जमाने भर मुझको रुलाती रही।

मैं जानता था कि,

मेरी वज्म में तू,नहीं है लेकिन,

मेरी निगाहें फिर भी

तुझे ढूंढती रही।।

 

इस कदर मुंह मोड़ ले गई जिंदगी

ये मैंने सोचा न था।

दुश्मन होते हैं गैर सभी

ऐसा भी नहीं,

कातिल अपना ही होगा ये,

मैंने सोचा न था।

ताउम्र जिसके प्यार में केे  कैद रहा था मैं

मझधार में रिहा कर देगी यह मैंने सोचा न था ।

कुछ पल तो पहले बड़ी

हसीन लगती थी दुनियां,

जीने की चाह और जगाती थी जिंदगी,

खौफ लगता था मौत से

अब इतनी जल्दी जीने की चाह मिट जाएगी

यह मैंने सोचा न था।

जंग तो होनी थी खंजर तो चलने ही थे

वार सीने में होता तो कोई गम न था

कातिल पीठ पर करेगा वार ये मैंने सोचा न था।

जिंदगी और बसंत

चलते -चलते पल ,दिन,महीने और साल गुजर जाते हैं.इंसान जिंदगी की सच्चाई से वाकिफ होते हुए भी भागम-भाग में रहता है.जिंदगी और बसंत कब आयी और कब चली गयी कोई पता ही नहीं चलता.बसन्त आता है फूल खिलते हैं लेकिन सदा बसंत ही नहीं रहता है,उसी प्रकार जिंदगी में भी जवानी का बसंत आता है लेकिन कब पतझड़ हुवा पता ही नहीं चलता.बस कल की जैसी बात लगती है.

iphuman

Sochbadlonow

I am I.P.Human My education is m.sc.physics and PGDJMC I am from Uttarakhand. I am a small blogger

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