“परीक्षा पर चर्चा” पीएम मोदी ने परीक्षार्थियों को दिए सफलता के टिप्स

पीएम मोदी ने की “परीक्षा पर चर्चा”परीक्षार्थियों को दिए सफलता के टिप्स।

 

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साभार अमर उजाला।

 

By iphuman

   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताल कोटरा स्टेडियम नई दिल्ली से 20 जनवरी 2020 को परीक्षा पर चर्चा की। देश भर से आये 2000 से अधिक छात्र -छात्राओं के साथ शिक्षकों ने भी इस कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।  पीएम ने छात्रों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए।देश भर के शैक्षिक संस्थानों विशेषकर हाईस्कूल तथा इंटर मीडिएट के छात्रों को परीक्षा में कैसे सफल हों और बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।छात्रों के प्रश्नों का जबाब देते हुए प्रधानमंत्री ने अभिभावकों को भी आगाह किया कि बच्चों पर पढ़ाई का और परीक्षा का बोझ न डालें।

एक्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा ‘Co-curricular activities न करना आपको रोबोट की तरह बना सकता है। आप इसे बदल सकते हैं। इसके लिए बेहतर समय प्रबंधन की आवश्यकता होगी।’

 

– प्रधानमंत्री ने कहा ‘सिर्फ परीक्षा के अंक जिंदगी नहीं हैं। कोई एक परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है। ये एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। लेकिन यही सब कुछ है, ऐसा नहीं मानना चाहिए। मैं माता-पिता से भी आग्रह करूंगा कि बच्चों से ऐसी बातें न करें कि परीक्षा ही सब कुछ है।’

 

– यहां पीएम मोदी ने छात्रों से सवाल किया कि क्या आपको 2001 में भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज याद है? हमारी क्रिकेट टीम को असफलताओं का सामना करना पड़ रहा था। मूड बहुत अच्छा नहीं था। लेकिन, उन क्षणों में क्या हम कभी भूल सकते हैं कि जो राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण ने किया। उन्होंने मैच को पलट दिया।

 

-पीएम मोदी ने छात्रों से कहा ‘सिर्फ परीक्षा के अंक जिंदगी नहीं हैं। कोई एक परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है। ये एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। लेकिन यही सब कुछ है, ऐसा नहीं मानना चाहिए। मैं माता-पिता से भी आग्रह करूंगा कि बच्चों से ऐसी बातें न करें कि परीक्षा ही सब कुछ है’।

 इसके साथ -साथ प्रधानमंत्री मोदी ने  चन्द्रयान का भी जिक्र किया ।टेक्नोलॉजी से जुड़ने तथा वैज्ञानिक सोच रखने की सलाह छात्रों को दी।

परीक्षा पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह ताला है जो विश्व के दरवाजे खोलता है और इंसान चाँद और मंगल तक पहुंच पाया है।शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने अन्य गतिविधियों पर भी जिक्र किया।खेल,संगीत ,कला आदि हर क्षेत्र में विद्यार्थियों को प्रतिभाग करना चाहिए।

चर्चा की सार्थकता-प्रधानमंत्री मोदी  इससे पहले “मन की बात” कार्यक्रम के माध्यम से सीधे देशवाशियों को सम्बोधित करते आ रहे हैं।और परीक्षा पर चर्चा ऐसा प्लेटफार्म है जहाँ वे सीधे स्कूली बच्चों से संवाद करते हैं और उनकी जिज्ञासाओं का उत्तर देते हैं।

देश के समस्त स्कूलों में प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम को सुनने या देखने की  व्यवस्था की जाती है।देश का मुखिया होने के नाते उनका यह प्रयास सराहनीय है।लेकिन परीक्षा तो साल के अंत मे होती है इस अवधि में छात्रों को किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है इस पर भी फोकस करने की जरूरत है।आज भी देश के सरकारी स्कूलों की हालत बहुत अच्छी नहीं है।सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर उपकरण तो हैं मगर कोई प्रशिक्षित कम्प्यूटर टीचर नहीं है।स्कूलों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था भी अधिकांश स्कूलों में नहीं है।स्कूलों में विषयाध्यापकों की भी बहुत कमी है।छात्रों के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है।खेलों में बच्चे तभी आगे बढ़ पाएंगे जब खेल का मैदान हो।

इतना ही नहीं स्वच्छ भारत मिशन का जिम्मा भी स्कूली बच्चों के कंधे पर ही है।खुद ही बच्चों को सालभर सफाई करनी पड़ती है।झाड़ू लगाना पड़ता है ।हम कैसे उन गरीब बच्चों को टेक्नोलॉजी से जोड़ पाएंगे जब सरकारी अधिकांस स्कूलों में प्रयोगशाला नहीं हैं और विज्ञान अध्यापकों की बहुत कमी है।

  पहाड़ों की बात करें तो कड़ाके की ठंड में बच्चे ठिठुर-ठिठुर कर प्रधानमंत्री की बात को सुन रहे थे।क्योंकि यह एक सरकारी कार्यक्रम था और शिक्षकों के साथ -साथ छात्रों को भी इस कार्यक्रम को देखना और सुनना था।

  समस्याओं के बीच भी इस कार्यक्रम से बच्चों में उत्साह इसलिये भी था कि उनके ही बीच के सहपाठी प्रधानंत्री के सामने लाइव  सवाल पूछ रहे थे।परीक्षा से पहले बच्चों में एक सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम परीक्षार्थियों के लिए संजीवनी का काम कर सकता है।

 

Sochbadlonow

I am I.P.Human My education is m.sc.physics and PGDJMC I am from Uttarakhand. I am a small blogger

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