भारत में रामराज्य क्यों नहीं चाहते थे ओशो?

भारत में रामराज्य की स्थापना आस्था के साथ-साथ राजनीति का भी अहम अंग रहा है.हिन्दू धर्म के में जब भी कोई अच्छे शासक और शासन का जिक्र होता है तो रामराज्य कहा जाता है.महात्मा गांधी भी राम राज चाहते थे.मगर बीसवीं सदी के आध्यात्मिक गुरु ओशो भारत में रामराज्य को लाने के पक्षधर नहीं थे.आखिर ओ क्या कारण रहे होंगे कि हिन्दू धर्म में ही पैदा हुए एक महान दार्शनिक और विद्वान ओशो भारत में रामराज्य नहीं चाहते थे

भारत में दरिद्रता कैसे मिटेगी?

भारत में रामराज्य की बात तो हर कोई करता है .मगर भारत की गरीबी और दरिद्रता कैसे मिटेगी ये कोई नहीं कहता.दरिद्रता महारोग है .और दरिद्र को नारायण कहना उसके महारोग को वोट देना है. दरिद्रता मिट,नी चाहिए दरिद्र मिटने चाहिए .और दरिद्रता के मिटाने के लिए अब एक ही उपाय है वह वैज्ञानिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग है.

मैं वैज्ञानिक तकनीकों का समर्थन जो कर रहा हूं, वह इसलिए कि तुम्हारे घाव शिवाय उसके और किसी तरह भरेंगे नहीं . छिप सकते हैं. छिपे हुए घाव उघड़े घावों से ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं, क्योंकि तुम उन्हें भूलने लगते हो और भीतर- ही- भीतर उनकी मवाद फैलने लगती है. जो छोटी सी फुंसी थी ,वह भी अगर छिपा ली जाए तो नासूर हो सकती है.और अगर उसकी चिकित्सा की ही न जाये तो कैंसर भी बन सकती हर.

क्या भारत सोने की चिड़िया थी?

भारत का सारा शास्त्र ये कहता नहीं थकता है कि भारत अतीत में सोने की चिड़िया थी.फिर अचानक ये चिड़िया कैसे गायब हो गयी?ओशो कहते हैं कि- भारत का रोग बहुत पुराना हो गया है 12 सदियों से दरिद्री है उन दिनों की दरिद्रता जब सारी दुनिया उसे सोने की चिड़िया रहती थी था सोने की चिड़िया कुछ थोड़े से लोगों के लिए तो उनको थोड़े से लोगों के लिए अभी सोने की चिड़िया है दरिद्रता की एक अनिवार्य प्रक्रिया है और लोगों में से 99 लोग जब दर्द होते हैं तो एक व्यक्ति के हाथ में सोने की चिड़िया लग जाती है शोभा वो तो है 99 व्यक्तियों की दरिद्रता उनके गड्ढे एक व्यक्ति के जीवन को धन के शिखर पर बिठा देते हैं तो जरूर राजा देव महाराज आते नगर सेठ थे और उनके लिए जीवन सोने की चिड़िया था इतिहास और पुराण उनकी ही स्थिति गाते हैं और इससे एक भ्रांति पैदा होती है जैसे कि सारा देश अनीता यह बात बिल्कुल ही झूठ है यह देश कभी भी देश की तरह अमीर नहीं रहा एक छोटा सा वर्ग इस सारे देश का शोषण करके छाती पर बैठा रहा है.

भारत में रामराज्य :

भारत में रामराज्य

गांधी को नकारते हुए ओशो लिखते हैं कि- भारत मे रामराज्य लाना चाहते थे महात्मा गांधी .लेकिन रामराज्य की अगर पूरी अन्तर्व्यवस्था हम समझे तो बिल्कुल सड़ी- गली थी,रूग्ण थी. राम राज्य में आदमी बाजारों में बिकते थे गुलामों की तरह .और क्या होगी दरिद्रता ,जहां आदमी बिकनी को मजबूर होते हो ?ऐसी दरिद्रता तो आज भी नहीं है. कौन बिकनी को राजी है ?बाजार में जैसे ढोरों के बाजार भरते हैं, मवेशियों के बाजार भरते हैं और बोली लगती है- ऐसे आदमी के बाजार भरते थेेे जहां आदमी बिकते थे.आदमी को कम औरतें ज्यादा बिकती थी. साधु-संतों का देश है !सती साध्वीयों का देश है! सीता, पार्वती ,द्रोपति का देश है! स्त्रियां बाजारों में यूं बिकती थी जैसे सामान बिकता है .बोली लगती थी.इस रामराज्य को भारत में गांधी फिर लाना चाहते थे !ओशो भारत में ऐसे रामराज्य को नहीं चाहते थे.

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विज्ञान और धर्म का समन्वय

उपरोक्त लेख ओशो की किताब “डूबते का आमंत्रण” से उद्धरित किया गया है.ये लेखक के विचार नहीं हैं.

महात्मा गांधी न तो कोई बड़े विचारक थे और ना ही कोई बड़ी विचारधारा छोड़ गए हैं. बहुत साधारण सी बातें हैं ,जिसको गांधीवादी विचारधारा के नाम से तुम शोरगुल मचाते हो. मगर अंधे के हाथ में तो कुछ भी लग जाए तो लगता है बहुत बड़ी चीज लग गई. सोच- विचार की क्षमता भी तुमने खो दी है .मैं तो तुम्हें सोच -विचार के पार ले जाना चाहता हूं, तुम सोच -विचार से भी नीचे जा रहे हो .

गांधीवाद और भारत में रामराज्य को क्यों नकारते थे ओशो?

थोड़ा सोचो तो सही महात्मा गांधी रेलगाड़ी के विरोध में थे और जिंदगी भर रेलगाड़ी में चले! तार टेलीफोन के खिलाफ थे, पोस्ट ऑफिस के खिलाफ थे. और जिंदगी भर जितने तार ,टेलीग्राम और चिट्ठी पत्री उन्होंने लिखी, शायद ही किसी ने लिखी हो. पाखाने में बैठे-बैठे भी चिट्ठी लिखवाते थे.संडास पर बैठे हैं और सेक्रेटरी पाखाने के बाहर बैठा है .वह बोलते जा रहे हैं और सेक्रेटरी चिट्ठी लिख रहा है.

Sochbadlonow

I am I.P.Human My education is m.sc.physics and PGDJMC I am from Uttarakhand. I am a small blogger

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