लॉक डाउन:देर से और जल्दबाजी में उठाया गया कदम.

प्राकृतिक आपदाओं पर इंसान का कोई बस नहीं चलता . महामारियों पर भी इंसान शीघ्र काबू नहीं पा सका है. आपदा और महामारी से होने वाली क्षति को न्यूनतम किया जा सकता है. बशर्ते कि समय से राहत और बचाव के कदम उठाए जाए. वैश्विक महामारी कोरोना के रोकथाम के लिए लॉक डाउन ही मात्र कारगर उपाय था.लेकिन भारत में यह कदम कुछ देर से उठाया गया.

वीआईपी कल्चर लाया कोरोना

जिस कोरोना महामारी ने आज विश्व भर नें त्राहि-त्राहि मचा रखी है उसके वैश्विक प्रसार के लिए VIP CULTURE और अमीर लोगों की मुख्य भूमिका रही है. अमीरों द्वारा लाया गया यह वायरस आज गरीब,मजदूर और कामगारों के लिए अभिशाप बन बैठा है.चीन के बुहान शहर में कोरोना फैलने की खबरें मीडिया में अक्टूबर से आना शुरू हो गयी थीं.मगर अमेरिका समेत विश्व के विकसित देश भी इसकी भयंकरता को भांपने में चूक गए.और भारत ने तो हद ही कर दी.जब कोरोना चीन से अन्य एशियायी देशों के साथ-साथ यूरोप और अन्य देशों में अपनी दस्तक दे चुका था.भारत में राजतिलक की तैयारियां हो रही थीं

ट्रंफ के स्वागत में भूल गए कोरोना की दस्तक

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंफ और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना की भयानकता को नहीं भांप सके.राष्ट्रपति ट्रंफ के स्वागत में लाखों की संख्या में भीड़ इकट्ठी कर दी गयी.साथ ही अंतर्राष्ट्रीय आवागमन निरन्तर जारी रहा.विदेशों से लोगों का भारत आने का सिलसिला अंतिम क्षणों तक जारी रहा .गायिका कनिका कपूर जो इसी बीच विदेश से भारत आई थी.उसकी कोरोना जांच किये बगैर बड़ी-बड़ी पार्टिया करने करती रहीं. सरकार थोड़ी तब जागी जब कनिका कपूर कोरोना पॉजिटिव पायी गयी.और बीजेपी के सांसद दुष्यंत सिंह कनिका कपूर की पार्टी में मौजूद थे.

संसद चलती रही मगर कोरोना पर बहस नहीं हुई

लॉक डाउन

जब पूर्ण रूप से ये साबित हो गया था कि भारत में कोरोना वाइरस ने पाँव फैला दिए हैं.सरकार राजनीतिक उठक-पठक में ब्यस्त रही.संसद का बजट सत्र चलता रहा .23 मार्च को संसद की कार्यवाही को अनिश्चित काल के स्थगित किया गया .मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

क्या केंद्र सरकार मध्यप्रदेश का इंतजार कर रही थी?

11 मार्च 2020 को विश्व स्वाथ्य संगठन ने कोरोना को Global pandemic घोषित कर दिया था.तब मध्य्प्रदेश में शिव राज सिंह चौहान की ताजपोसी के लिए राजनैतिक गेम चल रहा था.तब भी सरकार ने इसको गम्भीरता से नहीं लिया.और लॉक डाउन की तैयारी के लिए होमवर्क की कमी साफ झलकने लगी है.

नोट बन्दी की तरह जल्दबाजी में उठाया गया कदम.

8 नवम्बर 2016 को अचानक देश में नोट बन्दी लागू की गई.जिसकी भनक तक देशवासियों को नहीं थी.एकायक उठाये गए उस कदम से देश में बैंकों में लम्बी कतारें लग गयी.लोग अपने ही पैसों को निकालने के लिए घण्टों एटीएम और बैंकों में कतार में खड़े रहे .कुछ तो इस संकट को झेल नहीं पाए और जान गंवा बैठे.कई महीनों बाद अर्थव्यवस्था पटरी ओर लौटी.मगर नोट बन्दी ने जो जानें लीन थी ओ कभी नहीं लौटी.

नोटबन्दी से लेकर तालाबन्दी(Lockdown) तक गरीब ,मजदूर ही पिसता रहा है.

नोटबन्दी का सबसे बुरा असर गरीब,किसान और मजदूरों पर ही पड़ा था.और लॉक डाउन से भी यही वर्ग ज्यादा परेशान और पीड़ित है.लॉक डाउन के कारण देश के कोने -कोने में फैले प्रत्येक राज्य के श्रमिक बदहाल स्थिति में हैं.बेहतर होता कि पूर्व तैयारी कर मजदूरों,और श्रमिकों को लॉक डाउन से पूर्व अपने -आने राज्यों को भेजने की तैयारी की जाती और उनकी निरन्तर जांच चलती रहती.मजदूर,बच्चे,महिलाएं, बूढ़े सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर न होते और न हीं कई लोग जान गंवाते.

अंतिम क्षणों में घर वापसी क्या संकेत देती है.

कोरोना की महामारी जब अपने चरम ओर पहुंच रही है.लॉक डाउन का तीसरा चरण जारी है,ऐसे में राज्यों को मजदूरों,प्रवासियों को घर भेजना कुछ दाल में काला नजर आ रहा है.आखिर इतने लंबे समय तक क्यों इंतजार किया गया.प्रवासियों को घर वापस भेजना ही था तो लॉक डाउन से पहले ही ये कदम उठा लेने चाहिए थे.अब तो ग्रीन जोन में भी कोरोना पॉजिटिव की दस्तक होने लगी है.क्या प्रवासियों की लॉक डाउन के बीच में घर वापसी उनके लिए शहरों के दरवाजे बंद करने का प्लान तो नहीं?ये संका और चिंता तभी खत्म होगी जब देश में पूर्ण रूप से लॉक डाउन हट जाएगा और कोरोना वाइरस जड़ से खत्म हो जाएगा.देखते हैं राजनीति का ऊँट किस करवट बैठता है.

Sochbadlonow

I am I.P.Human My education is m.sc.physics and PGDJMC I am from Uttarakhand. I am a small blogger