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andhviswas kya hai?आँख बंद कर किसी कुँए या खाई में छलांग लगाने से क्या हश्र होगा , बिना गहराई जानें किसी तालाब में कूद जाने पर क्या होगा?यही अंधविश्वास है,हम तैरना नहीं जानते फिर भी तालाब में कूद जाते हैं तो डूबना स्वाभाविक ही होगा.सदियों से भारतीय समाज इसी अंधविश्वास से जकड़ा हुवा है.आज जब 21 वीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं,फिर भी भारत में अंधविश्वास की जड़ें गहरी होती जा रही हैं.आखिर क्यों लोग इसके पीछे भागते हैं,क्या इससे लोगों को फायदा होता होगा?

अंधविश्वास क्या है?(What is blind faith)

अगर हम अंधविश्वास के शब्दों को पृथक- पृथक कर अर्थ निकालें तो वह इस प्रकार बनता है -अंध+विश+ विश्वास इनके अर्थ पर गौर करते हैं-अंध=अज्ञान,विश=जहर,वास्=रहना या निवास करना तो हम कह सकते हैं:जहाँ अज्ञानता का जहर वास करता है वही अंधविश्वास है”

Andhwishwas एक ऐसा शब्द है जिसको सुनते ही ये महसूस हो जाता है कि जिस पर लोग विश्वास कर रहे हैं,वास्तव में वह अन्धापन है.मैंने संस्कृत के कई जानकारों से पूछा कि-अंधविश्वास का संधि विच्छेद क्या होता है,हैरान करने वाला उत्तर मिला .सबने यही कहा कि इसका कोई संधि विच्छेद होता ही नहीं है.अब आप समझ सकते हैं कि जिस शब्द का कोई संधि नहीं तो ओ विश्वास हमारे जीवन में क्या संधि(जोड़) करेगा?अर्थात अंधविश्वास एक ऐसी प्रचलित परंपरा है,जिस पर समाज और व्यक्ति आँख बंद कर कूद जाता है भले ही नतीजा कुछ भी हो.

अंधविश्वास की परिभाषा(definition of Blind faith):

मैंने google में कई बार search किया अंधविश्वास क्या है?और english में भी ‘blind faith’को सर्च किया मगर कुछ भी अर्थ नहीं मिला.google ने भी हाथ खड़े कर दिए.इस शब्द की कोई स्प्ष्ट व्याख्या और अर्थ है ही नहीं ,फिर भी अंग्रेजी में blindfaith का अर्थ कुछ इस प्रकार व्यक्त किया गया है”unquestioning belief in something, even when it’s unreasonable or wrong”

गरुड़ पुराण में अंधविश्वास क्या है?जानें
गरुड़ पुराण में blind faith

जानें गरुड़ पुराण के 2 आश्चर्यजनक मन्त्र -अंधविश्वास !

गरुड़ पुराण 18 पुराणों में एक प्रमुख पुराण है.इसमें मरने के बाद के लोक की गाथा बताई गई है .साथ ही इसमें 2 मन्त्र ऐसे हैं जिनको पढ़कर हर कोई आश्चर्यचकित हो जाएगा.देखते हैं ये मन्त्र क्या हैं?

संजीवनी मंत्र(Sanjeewani mantra)

यक्षि ओउम ऊं स्वाहा‘ grud puran के इस मंत्र को जपने से मृत व्यक्ति भी जीवित हो जाताा है. ऐसा इस मंंत्र का अर्थ है. kya ye संभव हो सकता हैै?soch badlo .अगर ये सच होता तो आप और हमारे पूर्वज ,माता -पिता और खुद हम aur aap kabhi marte hi nhi .

गरीबी दूर करने का मंत्र

इसी गरुड़ पुराण में गरीबी दूर करने के लिए भी मन्त्र है.मन्त्र जपो और गरीबी छूमंतर!मन्त्र क्या है ये मन्त्र देखते हैं-ओउम जू स:

मन्त्र का पोस्टमार्टम:

आज भारत की सबसे बड़ी समस्या और कमजोरी बेरोजगारी है,ये जग जाहिर है.अगर मन्त्रों से गरीबी मिट जाती तो भारत की गरीबी तो मिट ही जाती साथ ही भारत इस मंत्र का पेटेंट करके विश्व पर राज करता .इन दो मन्त्रों से बढ़कर और दूसरा अंधविश्वास क्या है?

ये भी पढ़ें अंधविश्वास पर http://www.sochbadlonow.com/धर्म-का-बैरियर-आखिर-कब-तक/

भारत के 10 अंधविश्वास :(10 Blind faith of India)

प्राचीन काल से ही भारत में अनेकों प्रकार के अंधविश्वास प्रचलित है.सिंधुकालीन सभ्यता के लोग भी कई प्रकार के अंधविश्वास मानते थे.जैसे इन्द्र को वर्षा का देवता,सूर्य को अग्नि का देवता,तथा सांड आदि की पूजा करना उनके मान्यताओं में शामिल थे.और ये निरन्तर जारी रहे .कुछ अंधविस्वास ऐसे थे जिनको आज सुनकर भी रूह कांप जाती है.देखते हैं हिंदू धर्म के कुछ चकित करने वाले विश्वास.

सती प्रथा:

(Sati pratha)

सती प्रथा क्या थी,और इसके पीछे का अंधविश्वास क्या है?सभी जानते हैं.मगर ये बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि सती प्रथा को खत्म करने के लिए राजाराम मोहन राय ने क्यों अपनी सारी जिंदगी और शक्ति इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए लगा दी? .जिसके कारण 4 दिसंबर 1829 को तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बैंटिंग ने सती प्रथा को गैर कानूनी घोषित किया.जानते हैं राजाराम राम मोहनराय की गाथा.’राजा राममोहनराय ने अपनी भाभी को जबरन जिंदा चिता में धकेलते हुवा देखा था.उन दिनों वाल विवाह एक कुप्रथा बन चुकी थी .उनके बड़े भाई की मृत्यु हो गयी थी.उस वक्त उनकी भाभी भी छोटी उम्र की ही थी.समाज के इस घनघोर अंधविश्वास के कारण उनकी भाभी को भी उनके बड़े भाई की चिता के साथ जला दिया गया.उस वक्त राजा राममोहनराय (Rajaram Mohan ray)छोटे थे.इस भयावह दृश्य को देखकर उन्होंने इस कलंक को खत्म करने का संकल्प लिया. और वे इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए ब्रिटिश शासन के सबसे बड़े न्यायालय प्रिवी काँसिल तक लड़े ‘.

जातिप्रथा (cast system)

जातिप्रथा वर्तमान में 21 वीं सदी की सबसे बड़ी महामारी, कोरोना से भी घातक बन चुकी है .यह भी हिन्दू धर्म में एक सबसे घृणित मान्यता और अंधविश्वास है.इंसान-इंसान से भेदभाव, छुवाछुत और असमानता मात्र एक मानसिक बीमारी और अंधविश्वास(Blind faith) के अतिरिक्त कुछ नहीं है.

जाति प्रथा का अंधविश्वास क्या है?
जाति प्रथा का अंधविश्वास

मूर्ति पूजा:(Idol worship)

मूर्ति पूजा की बात आती है तो कबीरदास का दोहा याद आ जाता है-“पत्थर पूजै हरि मिले तो मैं पूजूँ पहाड़,

ताते ये चाकी भली पीस खाए संसार”.

अगर मन्दिर और मूर्ति बनाने से बीमारी,गरीबी,बेरोजगारी दूर हो जाती तो भारत में अस्पतालों से ज्यादा मन्दिर-मस्जिद हैं.स्कूल,कालेजों से ज्यादा मन्दिर हैं,फिर भी भारत निरक्षरता को नहीं मिटा सका है,को छूने .जबकि ये कहा जाता है कि कण-कण में परमात्मा है तो फिर पत्थर पर सर पटकने से बड़ा अंधविश्वास क्या है (blind faith) ?

गंडा ताबीज:

गले में ताबीज बंधन भी खूब प्रचलित है.डर-भय को मिटाने के लिए ये बंधा जाता है.मगर ताबीज से कोई निर्भयी और निडर हुवा पता नहीं.

नीबू और मिर्च लटकाना:

नीबू और मिर्च को घर के बाहर लटकाना, गाड़ी में लटकाना आम बात है.यह एक तरफ तो लोगों का अंधविश्वास है ही,दूसरी तरफ हर शनिवार को नीबू और मिर्च की माला बनाकर बेचने वाले अपना गुजारा चलते हैं.अगर नीबू -मिर्च लटकाने से कुछ उन्नति और आर्थिक लाभ होता तो,इसकी बेचने वाले तो कब के अमीर बन गए होते.नीबू मिर्च खाने की चीजें हैं,नीबू बिटामिन का स्रोत है,इसको लटकाना नहीं खाना चाहिए.

कर्म कांड और हवन :

कर्म -काण्ड और हवन के बिना हिंदुओं की कोई भी रस्म पूरी नहीं होती है.जन्म से लेकर मृत्यु तक तरह-त809प्राप्त किया पूरह के कर्म-काण्ड में उलझे रहते हैं .मेरा तो व्यक्तिगत मानना है कि-हम भारतीयों ने जितनी ताकत सदियों से कर्म-कांडों की खोज और लगाई है उतनी शक्ति से विज्ञान की तरफ देखा होता तो, हर दूसरा नोबेल पुरस्कार भारत की झोली में होता.

जनेऊ पहनना:

उपनयन संस्कार हिंदू समाज में सबसे बड़ा संस्कार माना जाता है.उपनयन संस्कार को जनेऊ धारण भी कहा जाता है.जनेऊ एक धागा होता है जिसको गले में पहना जाता है.जनेऊ करने के पीछे तर्क है कि-इससे बालक की बुद्धि का विकास होता है ,उसको अक्ल आती है,समझदार हो जाते हैं आदि-आदि.अच्छी बात है,जब मात्र 2 रुपये का धागा गले में पहनने से लड़का बुद्धिमान,समझदार और अक्लमंद हो जाता है तो बुराई क्या है?

जनेऊ पहनने से क्या चमत्कार हो जाएगा.अंधविश्वास क्या है?यही संस्कारों से मिलकर बनी हुई परिपाटी है।
जनेऊ का अंधविश्वास

थोड़े समय के लिए मान लिया जाए कि जनेऊ पहनने से लड़के बुद्धिमान होते हैं,विकसित होते हैं तो लड़कियों को क्यों नहीं जनेऊ पहनाया जाता है?क्या लड़कियों को बुद्धिमान और अक्लमन्द नहीं बनाना चाहते?ये भेदभाव की भावना ही हमारे अंदर का अंधविश्वास है.संस्कारों के अंधविश्वास से लड़का और लड़की में भेद शुरू होता है.

गंगा जल और गोमूत्र:

जल ही जीवन है”ये तो प्रकृति का अनमोल उपहार है.और जल जीवन के लिए जितना जरूरी है,उतना ही घातक बीमारियों का भी कारण है अगर जल अशुद्ध पिया जाए तो.इसलिए हमेसा साफ-और स्वच्छ जल ही पीना चाहिए,हो सके तो छानकर, और उबालकर ही पानी पिएं.जिस गंगा जल को हम पवित्र और स्वच्छ मानते हैं,वह जल पीने क्या नहाने योग्य भी नहीं रहा है.आखिर पवित्र जल को छिड़कने से कौन सी बीमारी आजतक दूर हुई है?कोरोना काल में सेनिटाइजर लोगों के बचाव का साधन बना.तब न गो मूत्र और न ही कोई गंगा-जमुना का पवित्र जल काम आया.विज्ञान की कसौटी में जो मान्यता और परंपराएं फिट नहीं बैठती उसको अंधविश्वास ही तो कह सकते हैं.

झाड़ फूंक और तंत्र-मंत्र

भारत में सबसे बड़ा ठगी का व्यवसाय झाड़ फूंक और तंत्र-मंत्र विद्या है.लोग बीमारी में हॉस्पिटल जाने के बजाए किसी तांत्रिक और झाड़-फूंक वाले के पास जाते हैं,वह उनको अच्छी तरह लूट लेता है.बीमारी ठीक होने के बजाए और भयंकर रूप धारण कर लेती है.फिर डॉक्टर के पास जाते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.

शिव लिंग में दूध चढ़ाना:

पत्थर की बनी शिवलिंग पर महिलायें दूध क्यों चढाती हैं?क्या आप इसका कोई लॉजिक बता सकते हैं?देश में लाखों लीटर दूध इस प्रकार बर्बाद कर दिया जाता है.blind faith की भी कोई हद होती है.देश में कई बच्चे कुपोषण का शिकार हैं,अगर इतना दूध बचाया जाता तो हजारों बच्चों को पोषण मिल सकता था.मगर चश्मा तो अंधविश्वास का लगा है.

शिव लिंग.अंधविश्वास क्या है?

अंधविश्वास के कारण 🙁 Cause of blind faith)

  • अशिक्षा और अज्ञानता.
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अभाव.
  • शिक्षा प्रणाली में कमी.
  • डर और भय.
  • स्वर्ग की अभिलाषा.
  • झूठा दिखावा और पाखंड.
  • सामाजिक रीतिरिवाज और परंपराओं में शामिल होना.
  • धार्मिक भावनाओं में बहक जाना.
  • आस्था और श्रद्धा की भावना.
  • समाज सुधारकों का अभाव .
  • राजनीति और धर्म का गठजोड़.

अंधविश्वास रोकने के उपाय:

  • अंधविश्वास युक्त पाठ्यवस्तु को पाठ्यक्रम से हटाया जाए.
  • धार्मिक शिक्षा पद्धति को खत्म किया जाए.
  • काल्पनिक स्टोरी,जिनमें अंधविश्वास और तंत्र-मन्त्र विद्या का वर्णन हो ,को बच्चों को न पढ़ाया जाए.
  • अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों पर रोक लगाई जाए.
  • वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए.
  • अंधविश्वास और कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को सरकार द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाए साथ ही प्रोत्साहित भी किया जाए.

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Disclaimer:

इस आर्टिकल का उद्देश्य किसी की धार्मिक ,सामाजिक और व्यक्तिगत मान्यताओं को ठेस पहुंचाना नहीं है.चूंकि सती प्रथा भी हिन्दू समाज में एक रीतिरिवाज बन चुकी थी,और किसी स्त्री को जिंदा जला देना कहां तक उचित था?यहां तक कि नर बलि प्रथा भी व्याप्त थी.देवदासी प्रथा भी प्रचलित थी.इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि आखिर अंधविश्वास क्या है?और इसने समाज को को पीछे छोड़ना चाहिए.तभी भारत विकसित होने की दिशा में अग्रसर हो सकता है.मैं अपनी बात करूं तो मैंने न कभी जनेऊ पहनी और नहीं उपनयन संस्कार किया.साथ ही मैंने कोई हवन, कर्मकांड अभी तक किया है.यहां तक कि मैं श्राद्ध भी नहीं करता हूँ,न ही मैंने अपनी शादी में कोई चिन्ह पत्री मिलान की और न ही शादी का कोई शुभ लग्न देखा.कई ऐसे उदाहरण हैं जिनकी हकीकत जानकर आप हैरान हो जायँगे .अगर आप चाहते हैं मैं कुछ अदभुद अनुभव बताओं तो मुझे comment कर बताएं.


सोच बदलो समाज जगाओ

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