उत्तराखंड आंदोलन

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दमन के  लिए नहीं मांगा था उत्तराखंड राज्य ।अमन और चैन के लिए कुर्बानियां दी थी।उत्तराखंड आंदोलन   में शिक्षकों और कर्मचारियों की भी अहम भूमिका रही है।शिक्षक कहाँ विरोध कर रहे हैं।शिक्षक संगठनों ने तबादला एक्ट का जोरदार स्वागत किया था जब सरकार इस एक्ट को लेकर आई।सरकार के द्वारा ही  पारित एक्ट को अगर शिक्षक लागू करने की मांग कर रहे है तो ये सरकार का विरोध कैसे हुआ।सरकार ने शिक्षा विभाग को जोकर बना दिया है जब चाहो नचा दो।तीन प्रांतीय नेताओं के टाँसफ़र से क्या उत्तराखंड की  शिक्षा व्यवस्था ठीक हो जाएगी।

पहाड़ में 50 % से अधिक पद रिक्त है इस पर सरकार एक्शन नहीं ले रही है।ट्रांसफर के मसले पर ही सरकार फेल है तो नव नियुक्ति की उमीद करना बेकार ।भरी राज सभा में एक शिक्षिका को अपमानित किया गया और अब पूरे संगठन को ही  सूली पर चढ़ाने का काम ये सरकार कर रही है जो लोकतंत्र की मर्यादा को कम कर रही है।पहले सरकार ये स्पष्ट करे कि ट्रांसफर एक्ट के समय सारणी के अनुसार और एक्ट के प्रवधानों के अनुरूप समय से ट्रांसफर क्यों नही हुए,? इसके लिए कौन जिम्मेदार है यहां की जनता ने हड़ताली प्रदेश नहीं हकदारी  प्रदेश के लिए कुर्बानियां दी हैं ।अगर ऐसा ही खेल चलता रहा तो 1994 की आग फिर से यहां की मजबूरी बन जाएगी।अनुसूचित जाति जन जाति शिक्षक एसोसिएशन के पूर्व प्रांतीय मीडिया प्रभारी के रूप में मैं इस आंदोलन को पूर्ण समर्थन देता हूँ ।तथा विभाग द्वारा संघ के पदाधिकारियों के ट्रांसफर का पूर्ण रूप से विरोध करता  हूँ मुझे पता है कि इस ब्रिटिश हुकूमत वाली सरकार मेरे खिलाफ भी एक्शन ले सकती है मगर शिक्षक ही कमजोर हो गया तो फिर देश के भविष्य को कौन सँभालेगा।
जय शिक्षक
जय उत्तराखंड


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