आजादी के बाद भारत में प्रथम गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 तक का सफर :

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15 अगस्त सन 1947 को भारत की आजादी का पहला जश्न मनाया गया.ये आजादी लंबे संघर्ष और हजारों कुर्बानियों के बाद हांसिल हुई थी.आजादी के बाद से भारत के सामने कई चुनौतियां खड़ी थीं.सबसे पहले तो सफल लोकतंत्र की स्थापना के लिए देश में चुनाव कराने की पहाड़ सी समस्या थी.उस समय देश में आज की तरह संशाधन उपलब्ध नहीं थे.लोकतंत्र की ये पहली कठिन परीक्षा देश के सामने थी.

भारत की आजादी के बाद प्रथम आम चुनाव
भारत का राष्टीय ध्वज:तिरंगा

भारत की आजादी के बाद प्रथम आम चुनाव तक का सफर।

दो शताब्दियों से अंग्रेजों ने भारत का शोषण किया था.भारत की संपदा का अधिकांश भाग ब्रिटेन चला जाता था.अंगेजों ने भारत को सिर्फ लूटा ही नहीं वरन हिंदी मुस्लिम एकता के बीच वो जाते-जाते विभाजन की अमिट रेखा भी खींच गए.जिस भारत के युवाओं,किसानों,और क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता संग्राम में न जाति देखी,न धर्म देखा सबने मिलकर आजादी की लड़ाई को मंजिल तक पहुंचाया,भारत की आजादी के बाद का जश्न वो एक साथ नहीं मना सके.आजादी के साथ-साथ भारत के दो टुकड़े भी हो गए.पाकिस्तान भी एक स्वतंत्र देश बन गया.

भारत विभाजन की त्रासदी

भारत विभाजन माउंटबेटन योजना के तहत हुवा था.भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 में तय किया गया कि 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान अधिराज्य नामक दो स्वायत्त उपनिवेश बना दिये जायँगे और ब्रिटिश क्राउन उनको सत्ता सौंप देगी.

अन्ततः यही हुवा 15 अगस्त की मध्यरात्रि को दो राष्ट्र अस्तित्व में आ गए.इस विभाजन के बाद लगभग 40 लाख लोग मारे गए.बड़ी मात्रा में जन धन की हानि हुई.

भारत विभाजन की त्रासदी।

आजादी के बाद देशी रियासतों का विलय:

आजादी के बाद भारत में तीन प्रकार के क्षेत्र थे.

  1. ब्रिटिश भारत के क्षेत्र
  2. देशी राज्य
  3. फ्रांस और पुर्तगाली उपनिवेश

इस प्रकार हिंदुस्तान की आजादी के बाद देश में 565 देशी रियासतें अस्तित्व में थीं. ये रियासतें स्वतन्त्र सत्ता बनाये रखना चाहते थे.कश्मीर, हैदराबाद, और भोपाल रियासतों को छोड़कर शेष डेढ़ी रियासतों को भारत में विलय करा लिया गया.राज्यों के विलय के लिए सरदार पटेल ने अदम्य राजनीतिक शक्ति का परिचय दिया,उस वक्त पटेल अंतरिम सरकार में उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे.

आजादी के बाद राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या:

भारत की आजादी के बाद सबसे बड़ी दुःखद घटना राष्ट्रपिता गाँधी की हत्या होना था.भारत को आजाद हुए मात्र 5 माह 15 दिन ही हुए थे और 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने उनकी हत्या कर भारत को राजनीतिक रूप से अनाथ कर दिया था.जीवन भर स्वराज की बात करने वाले गाँधी जी आजादी के बाद का पहला आम चुनाव नहीं देख सके.सायद उस वक्त महात्मा गांधी जीवित होते तो भारत की आजादी के बाद देश की राह कुछ और बदल सकती थी.महात्मा गांधी देश को आजादी तो दिला गए मगर संवैधानिक भारत के गणराज्य को नहीं देख सके.भारत की आजादी के बाद देश की ये सबसे बड़ी कलंकित करने वाली घटना घटित हुई थी.

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी

आजादी के बाद कश्मीर पर पाकिस्तान का पहला युद्ध 22 अक्टूबर 1947:

भारत विभाजन की त्रासदी अभी थमी नहीं थी कि 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान ने कश्मीर पर हमला कर दिया.भारत की आजादी के बाद पाकिस्तान द्वारा पहला युद्ध थोपा गया.कश्मीर का विलय भारत में अन्य देशी रियासतों के साथ नहीं हो सका था.

1947 में अंग्रेजो के भारत छोड़ने के पहले और बाद में जम्मू एवं कश्मीर की रियासत पर नये बने दोनो राष्ट्रों में से एक में विलय का भारी दबाव था। भारत के बटवारे पर हुए समझौते के दस्तावेज के अनुसार रियासतो के राजाओं को दोनो में से एक राष्ट्र को चुनने का अधिकार था परंतु कश्मीर के महाराजा हरी सिह अपनी रियासत को स्वतंत्र रखना चाहते थे और उन्होने किसी भी राष्ट्र से जुड़ने से बचना चाहा। अंग्रेजो के भारत छोड़ने के बाद रियासत पर रियासत पर पाकिस्तानी सैनिको और पश्तूनो के कबीलाई लड़ाको हमला कर दिया।

इस भय से कि रियासत की फ़ौज इनका सामना नहीं कर पायेगी महाराजा ने भारत से सैनिक सहायता मांगी। भारत ने सैनिक सहायता के एवज में कशमीर के भारत में विलय की शर्त रख दी। महाराजा के हामी भरने पर भारत ने इस विलय को मान्यता दे दी और रियासत को जम्मु कश्मीर के नाम से नया राज्य बना दिया। भारतीय सेना की टुकड़ियां तुरंत राज्य की रक्षा के लिये तैनात कर दी गयी। किंतु इस विलय की वैधता पर पाकिस्तान असहमत था। कश्मीर समस्या का लंबा इतिहास है,आजादी से पूर्व और बाद भी.

आजादी के बाद संविधान का अंगीकरण:

भारत में संविधान सभा का गठन केबिनेट मिशन की सिफारिश ओर किया गया था.9 दिसम्बर 1946 को संविधान सबग की पहली बैठक हुई थी.यह बैठक नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल हॉल में हुई थी(अब संसद भवन).संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष डॉ0 सच्चिदानंद ,संविधान ड्रॉफ्टिंग समिति के अध्यक्ष डॉ0 भीमराव अंबेडकर तथा अध्यक्ष डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद थे.संविधान सभा की कुल 114 बैठकें हुईं.और यह 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में बनकर तैयार हो गया.

संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ0 भीमराव अंबेडकर 26 नवंबर 1949 को अध्यक्ष डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद को संविधान भेंट करते हुए.सौजन्य विकिपीडिया

एक स्वतंत्र गणतंत्र बनने और कानून का राज स्थापित करने के लिए भारत के संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को इस संविधान को अपनाया गया.इस प्रकार भारत की आजादी के बाद देश का अपना संविधान लागू होने के इंतज़ार में था.

भारत की आजादी के बाद प्रथम गणतंत्र दिवस:

आजादी की मैराथन जंग को जीतने के बाद भारत के सामने अपने कानून और संविधान की जरूरत थी.भारत को गणतंत्र बनाने की घोषणा 26 जनवरी 1929 को कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में कई गयी थी.9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा का गठन हुवा.संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकृत कर लिया.26 जनवरी 1950 को आजादी के बाद भारत का संविधान लागू हुवा.

भारत की आजादी के बाद प्रथम गणतंत्र दिवस की परेड
आजादी बाद प्रथम गणतंत्र दिवस की परेड


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